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आज के युवा लोग परिवार की भूमिका को नहीं मानते हैं | अगर कोई मां-बाप किसी को कुछ कह देते हैं,तो वह उनको बहुत बुरा लगता है | वह सोचते हैं की हमारे मां-बाप गलत है| वह हमें ऐसा क्यों बोल रहे हैं, पर उनको यह नहीं पता कि शायद उन्होंने अपनों से ज्यादा दूसरों की फिक्र करना आता है| और वह अपनी इस उम्र से गुजर चुके हैं ,इसलिए उनको हर चीज का पता है ,कि क्या सही है और क्या गलत | एक बात है की हमेशा कड़वी बात ही सही बात होती है| जो दिल को बुरी लगे हैं, और दिमाग मानने से इनकार करें वह बात हमेशा सही होती है | क्योंकि जो दवाई कड़वी होती है वही असर दायक साबित होती है|
हमें हमेशा अपने मां-बाप की बातों को समझना चाहिए और उन पर विचार करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत मां बाप को अपने बच्चों की बहुत फिक्र होती है क्योंकि वह नहीं चाहते कि हमारे बच्चे कहीं दर दर भटकते फिरे कहीं तकलीफ देखें क्योंकि मां-बाप अपने बेटों की तकलीफ नहीं देख सकते हैं बच्चे हमेशा मां बाप के कलेजे के टुकड़े होते हैं अगर सीने में दर्द होता है तो बहुत तकलीफ होती है
इतनी तकलीफ जब बैठे तकलीफ में होते हैं उतना ही दर्द होता है मां बाप की जीते जी मौत हो जाती हैं जब बेटे उनको घर से बाहर निकालते हैं और उनको बोलते हैं आपको कुछ समझ नहीं आता आप यूं ही सारे दिन बोलते रहते हो पर बेटे को यह नहीं पता कि जब वह भी छोटे थे तो ऐसे ही सारे दिन बोलते थे किसी चीज के लिए जिद करते थे अगर जब अपने मां बाप ने अपने साथ ऐसा कर दिया होता तो क्या हम जिंदा रह पाते नहीं रह पाते मर जाते हम इस दुनिया में हम जिस लायक बनाए हैं अपने मां बाप ने आज हम उस जगह नहीं होते हैं नहीं मांगते होंगे होंगे क्या मर जाते हैं हमें अपने मां बाप ने बनाया है
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